१. शिव गुरु मण्डल स्थापना की विधि (Mandal Setup Procedure)
मण्डल स्थापित करने के लिए घर का पूर्व या उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) स्थान सर्वोत्तम होता है। उस स्थान को जल व गंगाजल से स्वच्छ करके एक सात्विक चौकी पर पीला या लाल वस्त्र बिछाएं।
उस पर भगवान शिव का ध्यानस्थ चित्र रखें। चित्र के सम्मुख एक शुद्ध गाय के घी या तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें। एक तांबे के पात्र में स्वच्छ जल रखें, जिसका छिड़काव चर्चा के अंत में सभी भक्तों पर किया जाता है।
२. आसन नियम व बैठने का शिष्टाचार (Seating Etiquette)
साहब श्री हरिंद्रानंद जी का कहना था कि शिव गुरु के दरबार में सभी मनुष्य समान हैं। यहाँ न कोई धनी है, न निर्धन, न कोई ऊँचा, न नीचा।
- सभी गुरुभाई व गुरुबहनें सूती या ऊनी आसन पर रीढ़ की हड्डी सीधी करके बैठें।
- चर्चा के दौरान मोबाइल को साइलेंट रखें या ध्यानपूर्वक भक्ति में लीन रहें।
- शिव चर्चा का संचालन करने वाला व्यक्ति भी स्वयं को अन्य शिष्यों की भांति शिव का शिष्य ही समझे।
३. शंखनाद एवं मंदिर घंटी वादन का महत्व (Shankh & Bell Benefits)
शिव चर्चा के आरंभ में ३ बार सुमधुर शंखनाद किया जाता है। वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से शंख की ध्वनि से निकलने वाले स्पंदन वातावरण के सूक्ष्म जीवाणुओं का नाश करते हैं तथा मस्तिष्क की तरंगों को शांत करते हैं।
इसी प्रकार पीतल की घंटी बजाने से ॐ-कार की निरंतर ध्वनि उत्पन्न होती है, जो ध्यान लगाने में अति सहायक है।
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