१. व्यावसायिकता एवं चंदा प्रथा का सख्त निषेध (No Commercialization)
साहब श्री हरिंद्रानंद जी ने शिव चर्चा आंदोलन की नींव निष्काम भाव पर रखी थी। उनका स्पष्ट निर्देश था कि जहाँ धन का लेन-देन या व्यापार घुसेगा, वहाँ से शिव भाव समाप्त हो जाएगा।
२. गुरुभाई एवं गुरुबहन का पावन संबंध (Gurubhai & Gurubehen Respect)
चूँकि सभी शिव शिष्य भगवान शिव को अपना गुरु मानते हैं, इसलिए वे आपस में शिव परिवार के सदस्य हैं। पुरुषों को “गुरुभाई” तथा नारियों को “गुरुबहन” कहकर संबोधित किया जाता है।
इस संबंध में परस्पर सम्मान, भाईचारे व संयम का होना अनिवार्य है। एक-दूसरे की व्यक्तिगत आलोचना करने के बजाय केवल शिव की दया की चर्चा की जानी चाहिए।
३. शिव चर्चा समूह गोष्ठी की समय-सारणी (Step-by-Step Timetable)
- प्रथम १० मिनट: शंखनाद, ३ बार ॐ कार ध्वनि एवं १ दया प्रार्थना भजन (प्रथम सूत्र दया)।
- मध्य ४५ मिनट: शिव की गुरुता, साहब श्री के विचार व अनुभवों की चर्चा (द्वितीय सूत्र चर्चा)।
- अंतिम १५ मिनट: १०८ बार नमः शिवाय मंत्र का शांत ध्यान जाप व प्रणाम (तृतीय सूत्र नमन)।
- समापन: चरणामृत/सात्विक प्रसाद वितरण व शांति पाठ।
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